Namami Gange Yojana 2022 नमामि गंगे योजना प्रोजेक्ट

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सरकार ने गंगा नदी को सफाई को नजर में रखते हुए यह योजना लागू की है यहाँ पर हम आपको बतायेगें की भारत सरकार के पर्यावरण मन्त्रालय की Flagship नमामि गंगे योजना 2022 क्या है, नमामि गंगे से किन राज्यों को लाभ, योजना की Highlights, नमामी गंगे प्रोजेक्ट के उद्देश्य एवं लाभल, योजना का कार्यान्वयन एवं सफलता आदि की पूरी जानकारी

गंगा नदी भारत की राष्ट्रीय नदी है। इस नदी को भारतवासी सबसे पवित्र मानते हैं। गंगा नदी भारत की सब नदियों से लंबी है, इसकी लंबाई 2,525 किलोमीटर है। गंगा उत्तराखंड राज्य के उत्तरकाशी जिले के गंगोत्री ग्लेशियर से निकलती है। किन्तु गंगा नदी की कई सहायक नदियां विलुप्त हो चुकी हैं या सूख चुकी है।

गंगा नदी को पर्यावरण मंत्रालय ने सबसे अधिक प्रदूषित और खतरे में घोषित किया। गंगा को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त रखने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण योजना नमामि गंगे बनाई। 

Namami Gange Programme – नमामि गंगे अभियान 

नमामि कार्यक्रम, पर्यावरण और वन मंत्रालय के प्रोजेक्ट नैशनल मिशन फोर क्लीन गंगा ( MCG)  का फ्लैगशिप प्रोग्राम यानि सबसे प्रमुख कार्यक्रम है। इस Namami Gange Yojana के क्रियान्वयन में जल संसाधन और नदी विकास कार्यालय भी सम्मलित हैं। 

इस एकीकृत गंगा संरक्षण मिशन (Integrated Conservation Mission)  की घोषणा जून 2014 में हुई थी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गंगा नदी और इसकी सहायक नदियों के संरक्षण के लिए बजट को चार गुना कर 20,000 करोड  रुपयों की मजूरी दी। और Namami Gange Yojana को 100% केन्द्रीय हिस्सेदारी के साथ केन्द्रीय योजना का रुप दिया गया। 

इस Namami Gange Yojana के दो मुख्य उद्देश्य थे गंगा नदी के प्रदूषण को कम करना तथा गंगा नदी को पुनर्जीवित करना।

नमामि गंगे योजना Highlights 

योजना का नाम Namami Gange Yojana 2022
किसने शुरू कीपर्यावरण और वन मंत्रालय, केंद्रीय जलसंसाधन मंत्रालय, नदी विकास  और गंगा कायाकल्प विभाग
योजना प्रारंभ तिथि2014
परियोजना की अवधि18 वर्ष 
आधिकारिक वेबसाईट pmindia.gov.in

Namami Gange Yojana का उद्देश्य

गंगा नदी के प्रदूषण को खत्म करना, सहायक नदियों को पुनर्जीवित करना, स्वच्छ जल का लाभ देशवासियों तक पहुंचाना।

गंगा नदी न केवल सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व की है, बल्कि देश की 40% आबादी गंगा नदी पर निर्भर है। 2014 में न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए, प्रधान मंत्री ने कहा: “अगर हम इसे साफ कर सकते हैं, तो यह देश की 40 प्रतिशत आबादी के लिए एक बड़ी मदद होगी। इसलिए गंगा की सफाई भी एक आर्थिक एजेंडा है।”

इस दृष्टि को लागू करने के लिए, सरकार ने गंगा नदी के प्रदूषण को समाप्त करने और इसे पुनर्जीवित करने के लिए ‘नमामि गंगे’ नामक एक एकीकृत गंगा कायाकल्प मिशन शुरू किया। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नदी की सफाई के लिए बजट को चौगुना करके और इसे 100% केंद्रीय भागीदारी के साथ गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के उद्देश्य से इस Namami Gange Yojana को लागू किया है।

नमामि गंगे प्रोजेक्ट का कार्य तीन भागों में बांटा गया :

  • प्रवेश स्तर की गतिविधियां जो तुरंत दिखाई देती हैं जैसे नदी की सतह की सफाई,  ग्रामीण स्वच्छता, शौचालय नण, घाटों की मरम्मत करना आदि। 
  • मध्यम अवधि की गतिविधियां जो समय सीमा के 5 वर्षो के भीतर लागू की जाएंगी जैसे तकनीकी संस्थानों का प्रदूषण एवं कचरे की समस्या का निवारण, नगरपालिका की सीवरेज कैपेसिटी बढाना, वनपोरण इत्यादि। 
  • दीर्घकालिक गतिविधियां जो समय सीमा के 10 वर्षों के भीतर लागू की जाएंगी। ये हैं बेहतर जल उपयोग क्षमता, सिंचाई की क्षमता को बढाना, नदी का पर्याप्त प्रवाह सुनिश्चित करना। 

Coverage Area of Namami Gange Project

  • उत्तर प्रदेश 
  • उत्तराखंड 
  • झारखंड 
  • बिहार 
  • पश्चिम बंगाल 

Namami Gange Project Cities List

नमामि गंगे योजना के प्रोजेक्ट इन शहरों में शुरू किए गये :

  • हरिद्वार, ऋषिकेश, जोशीमठ,  बद्रीनाथ, गोपेश्वर, नंदप्रयाग, गोचर, कीर्तिनगर, मुनी की रेती, टिहरी, देवप्रयाग, रूद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, श्रीनगर आदि। 

नमामि गंगे योजना का कार्यान्वयन तथा सफलता :

1. सीवरेज उपचार क्षमता का निर्माण  Creating Sewage Treatment Capacity: 

नम्बर ओफ सीवेज प्रबंधक योजनाएं- 64 कार्यान्वित की जा रही हैं। 

राज्य – उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिमी बंगाल, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान राज्यों में 81 योजनाएं पूरी की जा चुकी हैं। 

2. नदी फ्रंट विकास का काम Creating River-Front Development : 

263 घाटों, श्मशानघाटों, कुंडो तथा तालाबों के निर्माण, आधुनिकीकरण और नवीनीकरण के लिए 64 परियोजनाएं शुरू की जा चुकी हैं। 

3. नदी की सतह की सफाई River Surface Cleaning:

इस Namami Gange Yojana के अन्तर्गत घाटों और नदी की सतह पर तैरते ठोस कचरे की सफाई का काम 11 स्थानों पर आरम्भ किया गया है। 

4. जैव-विविधता संग्रह Bio- Diversity Conservation : 

गंगा कायाकल्प के अन्तर्गत एन एम सी जी का दीर्घकालीन दृष्टिकोण है गंगा नदी के सभी स्थानिक और लुप्तप्राय जीवों की आबादी को बहाल करना। इसके लिए उच्च जैव विविधता वाले क्षेत्रों की पहचान की गई है। 

और इसमें सफलता पाने के लिए गंगा प्रहरी के अन्तर्गत स्वयंसेवकों को तैयार किया जारहा है। 

केन्द्रीय अन्तर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान इस कार्य में संलग्न है। 

5. वनपोरण Afforestation :

Namami Gange Yojana का जरूरी घटक है वानिकी हस्तक्षेप (Forestry Interventions). इसका उद्देश्य है नदियों के शीर्ष जल क्षेत्रों में वनों की उत्पादनकताऔर विविधता को बढ़ाना। 

वन अनुसंधान संस्थान ने गंगा नदी तट राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में 1,34,106  हेक्टेयर क्षेत्र में चार प्रमुख मदों के तहत कार्य करने की योजना बनाई है- प्राकृतिक परिदृश्य, कृषि परिदृश्य, शहरी परिदृश्य और संरक्षण हस्तक्षेप। 

6. जन जागरुकता Public Awareness :

नमामी गंगे योजना की सफलता सामुदायिक भागीदारी पर भी निर्भर करती है। अतः योजना के अन्तर्गत कार्यशालाओं, संगोष्ठियो और सम्मेलनों जैसी गतिविधियां आयोजित की हैं। रैलियों, अभियानों, प्रदर्शनियों, श्रमदान, स्वच्छता अभियान वृक्षारोपण, अभियान आदि के माध्यम से जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया है। टीवी, रेडियो, प्रिंट मीडिया विज्ञापन, प्रदर्शित लेखों का इस्तेमाल किया है। सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म के द्वारा भी प्रचार किया जा रहा है। 

7. औद्योगिक बहिःस्त्राव निगरानी Industrial Effluent Monitoring :

Grossly Polluting Industries (GPIz)  की संख्या अप्रैल 2019 में 1072 थी। इन प्रदूषणकारी उद्योगों की नियमित जांच और निरिक्षण से उन्हें निर्धारित पर्यावरण मापदंडों के अनुपालन पर वियवश किया है। 

अनुपालन न करने पर 215  तकनीकी संस्थानों को बंद कर दी गई हैं। 110 जीपीआइ के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। 

8. गंगा ग्राम Ganga Gram:

पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय ने 5 राज्यों उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड एवं पश्चिम बंगाल में गंगा नदी के तट पर स्थित 1674 ग्राम पंचायत की है। मिनिस्ट्री ऑफ ड्रिंकिगवाटर एन्ड सैनिटेश ने इन पंचायतों में 578 करोड रुपयों की लागत से 15,27,105  शौचालयो का निर्माण करने का ढांचा बनाया है। आधे से अधिक शोचालयों का निर्माण हो चुका है। 

गंगा संरक्षण की चुनौती बहु क्षेत्रीय और बहु आयामी है। इसमें कई हितधारकों की भी भूमिका है। विभिन्न मंत्रालयों के बीच एवं केन्द्र – राज्य  के बीच समन्वय होना बहुत जरूरी है। अतः केंद्र एवं राज्य स्तर पर निगरानी तंत्र को बेहतर करने के अनेक उपाय तथा प्रयास किए गये हैं। 

हम सभी को हमारी राष्ट्रीय नदी गंगा को स्वच्छ रखने का प्रयास करना चाहिए।

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