भारत की सड़कों पर सुरक्षित और बाधारहित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए, केंद्र सरकार ने 4 मार्च 2016 को ‘राष्ट्रीय राजमार्ग रेलवे क्रॉसिंग हटाने की सरकारी पहल: सेतु भारतम योजना’ का शुभारंभ किया था. इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य 2019 तक सभी राष्ट्रीय राजमार्गों को रेलवे लेवल क्रॉसिंग से मुक्त करना था. यह पहल सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और देश की लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ाने में मील का पत्थर साबित हुई है.
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सेतु भारतम योजना: एक विस्तृत अवलोकन
भारत में बढ़ती आबादी और आर्थिक विकास के साथ, सड़क और रेल यातायात दोनों में भारी वृद्धि हुई है. ऐसे में, राष्ट्रीय राजमार्गों पर मौजूद रेलवे लेवल क्रॉसिंग सुरक्षा के साथ-साथ यातायात प्रवाह के लिए एक बड़ी चुनौती बन गए थे. इन क्रॉसिंग पर अक्सर लगने वाले लंबे जाम और होने वाली दुर्घटनाएं न केवल लोगों का समय बर्बाद करती थीं, बल्कि जान-माल का भी नुकसान करती थीं.
इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के तत्वावधान में सेतु भारतम योजना की शुरुआत की. इस योजना का प्राथमिक लक्ष्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर सुरक्षित और निर्बाध यात्रा के लिए पुलों का निर्माण करना है. इसके लिए, 208 नए रोड ओवर ब्रिज (ROB) और रोड अंडर ब्रिज (RUB) के निर्माण की परिकल्पना की गई है, जो मौजूदा रेलवे क्रॉसिंग की जगह लेंगे. इसके अलावा, लगभग 1500 पुराने और जर्जर पुलों को चौड़ा करने, मरम्मत करने या बदलने का भी लक्ष्य रखा गया है, जिनमें से कई ब्रिटिश काल के हैं. इस पूरी परियोजना के लिए ₹50,000 करोड़ के निवेश का प्रावधान किया गया था.
योजना के मुख्य उद्देश्य और लक्ष्य
सेतु भारतम योजना सिर्फ पुल बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कई व्यापक उद्देश्य हैं जो देश के समग्र बुनियादी ढांचे और यातायात व्यवस्था को मजबूत करते हैं:
- राष्ट्रीय राजमार्गों को रेलवे क्रॉसिंग-मुक्त बनाना: योजना का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य 2019 तक सभी राष्ट्रीय राजमार्गों को रेलवे लेवल क्रॉसिंग से मुक्त करना था.
- नए ROB/RUB का निर्माण: देश भर में 208 नए रोड ओवर ब्रिज (ROB) और रोड अंडर ब्रिज (RUB) का निर्माण किया जाना था. इन पुलों से यातायात को रेलवे लाइनों के ऊपर या नीचे से गुजारा जा सकेगा, जिससे ट्रेन के इंतजार में लगने वाला समय खत्म हो जाएगा. MoRTH की वेबसाइट के अनुसार, 19 राज्यों में इन ROBs की पहचान की गई है, जिनमें आंध्र प्रदेश (33), असम (12), बिहार (20), छत्तीसगढ़ (5), गुजरात (8), हरियाणा (10), हिमाचल प्रदेश (5), झारखंड (11), कर्नाटक (17), केरल (4), मध्य प्रदेश (6), महाराष्ट्र (12), ओडिशा (4), पंजाब (10), राजस्थान (9), तमिलनाडु (9), उत्तराखंड (2), उत्तर प्रदेश (9), और पश्चिम बंगाल (22) शामिल हैं.
- पुराने पुलों का जीर्णोद्धार: लगभग 1500 मौजूदा पुलों का सर्वेक्षण कर उनकी संरचनात्मक स्थिति का मूल्यांकन किया गया. इन पुलों को मजबूत करने, चौड़ा करने या पुनर्स्थापित करने का काम भी योजना का हिस्सा है, ताकि वे आधुनिक यातायात भार को सहन कर सकें.
- इंडियन ब्रिज मैनेजमेंट सिस्टम (IBMS) की स्थापना: नोएडा स्थित इंडियन एकेडमी फॉर हाईवे इंजीनियर्स (IAHE) परिसर में भारतीय पुल प्रबंधन प्रणाली (IBMS) की स्थापना की गई है. यह प्रणाली राष्ट्रीय राजमार्गों पर सभी पुलों का एक डिजिटल डेटाबेस बनाती है, जिसमें उनकी आयु, स्थिति, डिज़ाइन और मरम्मत का इतिहास दर्ज होता है. लगभग 11 फर्मों की मदद से 50,000 से अधिक पुलों का सफलतापूर्वक निरीक्षण किया गया है, जिससे उनकी गुणवत्ता की जांच और ग्रेडिंग संभव हो पाई है.
सेतु भारतम योजना के प्रमुख लाभ
इस योजना ने देश के सड़क परिवहन क्षेत्र में कई सकारात्मक बदलाव लाए हैं:
- सड़क सुरक्षा में जबरदस्त सुधार: रेलवे लेवल क्रॉसिंग के समाप्त होने से दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है. मार्च 2020 तक की रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना के कार्यान्वयन के कारण सड़क दुर्घटनाओं में 50% से अधिक की कमी देखी गई है. इससे अनमोल जिंदगियां बची हैं और मानवीय क्षति कम हुई है. एक यात्री ने बताया, “पहले रेलवे फाटक पर 20-25 मिनट का इंतजार आम बात थी, अब सीधा पुल के ऊपर से निकल जाते हैं, कितनी सहूलियत हो गई है!”
- यात्रा के समय और ईंधन की बचत: ROB और RUB बनने से गाड़ियों को अब ट्रेन के गुजरने का इंतजार नहीं करना पड़ता, जिससे यात्रा का समय काफी कम हो गया है. कम ट्रैफिक जाम का मतलब है कम ईंधन की खपत और पर्यावरण पर कम प्रदूषण.
- लॉजिस्टिक्स दक्षता में वृद्धि: राष्ट्रीय राजमार्गों पर निर्बाध यातायात से माल ढुलाई तेज और कुशल हो गई है. इससे व्यापार और उद्योग को सीधा लाभ हुआ है, क्योंकि लॉजिस्टिक्स लागत कम हुई है और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ इंडेक्स में भारत की रैंकिंग बेहतर हुई है.
- रोजगार सृजन: बड़े पैमाने पर पुलों के निर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास से हजारों लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं.
- बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण: पुराने और जर्जर पुलों के पुनर्निर्माण और चौड़ीकरण से देश के सड़क बुनियादी ढांचे को आधुनिकता मिली है, जो भविष्य की यातायात जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है.
कार्यप्रणाली और तकनीकी पहलू
सेतु भारतम योजना केवल निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का भी भरपूर उपयोग किया गया है. पुलों के सफल निर्माण के लिए आयु, दूरी, देशांतर, अक्षांश, सामग्री और डिज़ाइन जैसी वैज्ञानिक तकनीकों का प्रयोग किया जाता है. नए पुलों के मानचित्रण और निर्माण में यह तकनीक बेहद उपयोगी साबित हुई है. इसके अलावा, मोबाइल इंस्पेक्शन यूनिट्स (MIU) के डेटा का उपयोग परियोजना के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है. यह योजना ग्रीनफील्ड (नए निर्माण) और ब्राउनफील्ड (मौजूदा संरचनाओं में सुधार) दोनों तरह की परियोजनाओं को कवर करती है.
चुनौतियाँ और भविष्य की दिशा
किसी भी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना की तरह, सेतु भारतम योजना को भी कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, जैसे भूमि अधिग्रहण में देरी, रेलवे और सड़क विभागों के बीच समन्वय की कमी और पर्यावरणीय मंजूरी. हालांकि, सरकार इन चुनौतियों का सामना करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तेज करने के लिए प्रयासरत है.
सेतु भारतम योजना भारत के परिवहन परिदृश्य को बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. यह सिर्फ पुलों का निर्माण नहीं कर रही, बल्कि देश को एक सुरक्षित, तेज और कुशल सड़क नेटवर्क प्रदान कर रही है, जो आर्थिक प्रगति और जन-जीवन की बेहतरी के लिए अपरिहार्य है. ‘बेहतर कनेक्टिविटी, बेहतर भारत’ – यह मंत्र इस योजना की सफलता में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है.