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PM Kusum Yojana Online Registration Eligibility and Benefits: जानिए कैसे उठाएं लाभ

आज के दौर में जब खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, ऐसे में किसानों के लिए बिजली और सिंचाई का खर्च एक बड़ी चुनौती बन गया है। इसी समस्या का समाधान लेकर आई है केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी PM Kusum Yojana online registration eligibility and benefits, जिसके तहत किसानों को सौर ऊर्जा (solar energy) अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। यह योजना किसानों को न केवल अपनी सिंचाई की जरूरतों को पूरा करने में मदद करती है, बल्कि उन्हें अतिरिक्त आय का साधन भी प्रदान करती है, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।

PM कुसुम योजना क्या है? (What is PM Kusum Yojana?)

प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM) योजना को नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of New and Renewable Energy – MNRE) द्वारा मार्च 2019 में शुरू किया गया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र को डी-डीजलीकरण (de-dieselisation) करना, किसानों को ऊर्जा और जल सुरक्षा प्रदान करना, उनकी आय में वृद्धि करना और पर्यावरणीय प्रदूषण को कम करना है। इस योजना को 31 मार्च 2026 तक के लिए बढ़ा दिया गया है।

योजना के मुख्य घटक (Main Components of the Scheme)

PM-KUSUM योजना तीन मुख्य घटकों में विभाजित है, जो किसानों को अलग-अलग तरीकों से सौर ऊर्जा का लाभ उठाने का अवसर देते हैं:

  • घटक-A (Component-A): छोटे सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना (Setting up Small Solar Power Plants)

    इस घटक के तहत, किसान या किसानों का समूह, सहकारी समितियाँ, पंचायतें, किसान उत्पादक संगठन (FPOs), और जल उपयोगकर्ता संघ (WUAs) अपनी बंजर या अनुपयोगी भूमि पर 500 किलोवाट से 2 मेगावाट क्षमता के विकेन्द्रीकृत ग्रिड-कनेक्टेड सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर सकते हैं। इससे उत्पन्न बिजली को वे स्थानीय डिस्कॉम (DISCOM) को बेचकर 25 साल तक निश्चित आय प्राप्त कर सकते हैं। आम तौर पर, 1 मेगावाट क्षमता के संयंत्र के लिए लगभग 4-5 एकड़ (2 हेक्टेयर) भूमि की आवश्यकता होती है।


  • घटक-B (Component-B): स्टैंड-अलोन सौर कृषि पंपों की स्थापना (Installation of Stand-alone Solar Agriculture Pumps)

    यह घटक उन किसानों के लिए है जो ऑफ-ग्रिड क्षेत्रों (जहाँ बिजली की आपूर्ति नहीं है) में रहते हैं। इसके तहत, किसान 7.5 HP क्षमता तक के स्टैंड-अलोन सौर कृषि पंप लगा सकते हैं। इससे उन्हें डीजल पंपों पर होने वाले भारी खर्च से छुटकारा मिलता है और सिंचाई के लिए एक विश्वसनीय व पर्यावरण-अनुकूल स्रोत मिलता है।


  • घटक-C (Component-C): ग्रिड-कनेक्टेड कृषि पंपों का सौरीकरण (Solarisation of Grid-Connected Agriculture Pumps)

    इस घटक में दो उप-घटक हैं: व्यक्तिगत पंपों का सौरीकरण (Individual Pump Solarisation – IPS) और फीडर-स्तर का सौरीकरण (Feeder Level Solarisation – FLS)। इसके तहत, किसान अपने मौजूदा ग्रिड-कनेक्टेड कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से जोड़ सकते हैं। वे सौर ऊर्जा का उपयोग अपनी सिंचाई की जरूरतों को पूरा करने के लिए कर सकते हैं और यदि अतिरिक्त बिजली उत्पन्न होती है, तो उसे डिस्कॉम को बेचकर आय कमा सकते हैं।


किसानों के लिए सब्सिडी और वित्तीय सहायता (Subsidy and Financial Assistance for Farmers)

PM-KUSUM योजना के तहत सरकार किसानों को generous financial assistance देती है ताकि सौर ऊर्जा को अपनाना उनके लिए आसान हो सके।

  • घटक-B और घटक-C (IPS) के लिए:

    केंद्र सरकार बेंचमार्क लागत या निविदा लागत (जो भी कम हो) का 30% तक केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA) प्रदान करती है। राज्य सरकार भी कम से कम 30% सब्सिडी देती है। ऐसे में किसान को कुल लागत का अधिकतम 40% वहन करना होता है। इसमें भी किसान बैंक से लोन लेकर केवल 10% शुरुआती भुगतान के साथ सोलर पंप लगवा सकते हैं। हालांकि, कुछ विशेष राज्यों जैसे पूर्वोत्तर राज्यों, सिक्किम, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में केंद्र सरकार 50% तक CFA प्रदान करती है। 20 नवंबर 2023 के एक आदेश के अनुसार, Component B और C (IPS) को राज्य की 30% हिस्सेदारी के बिना भी लागू किया जा सकता है, जिसमें CFA 30% रहेगा और किसान को 70% वहन करना होगा।


  • घटक-A के लिए:

    डिस्कॉम को सौर ऊर्जा खरीदने के लिए 5 साल की अवधि के लिए ₹0.40 प्रति यूनिट या ₹6.6 लाख प्रति मेगावाट (जो भी कम हो) का प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन (PBI) मिलता है।


केंद्रीय बजट 2025-26 के तहत, PM-KUSUM योजना के लिए ₹2,600 करोड़ का आवंटन किया गया है। सही मायनों में यह योजना किसानों के लिए ‘ऊर्जा सुरक्षा’ और ‘आय सुरक्षा’ का एक डबल तोहफा है।

PM कुसुम योजना के लिए योग्यता (PM Kusum Yojana Eligibility)

PM-KUSUM योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण योग्यता मानदंड (eligibility criteria) हैं:

  • आवेदक की नागरिकता: आवेदक भारतीय किसान होना चाहिए।
  • भूमि का स्वामित्व: आवेदक के पास कृषि योग्य भूमि होनी चाहिए।
  • घटक-A के लिए:
    • व्यक्तिगत किसान, किसानों का समूह, सहकारी समितियाँ, पंचायतें, FPOs, और WUAs आवेदन कर सकते हैं।
    • बंजर या अनुपयोगी भूमि का उपयोग किया जा सकता है।
    • सौर ऊर्जा संयंत्र की क्षमता 0.5 MW से 2 MW के बीच होनी चाहिए।
    • संयंत्र अधिमानतः सब-स्टेशन के 5 किमी के दायरे में स्थापित होना चाहिए।
  • घटक-B और घटक-C के लिए (व्यक्तिगत पंप सौरीकरण):
    • सभी व्यक्तिगत किसान पात्र हैं।
    • छोटी और सीमांत किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी जो माइक्रो-इरिगेशन सिस्टम का उपयोग करते हैं।
    • पंप की क्षमता 7.5 HP तक होनी चाहिए। 7.5 HP से अधिक क्षमता वाले पंपों के लिए भी आवेदन किया जा सकता है, लेकिन केंद्रीय वित्तीय सहायता 7.5 HP की क्षमता तक ही सीमित होगी।
    • सहकारी समितियाँ, पंचायतें, जल उपयोगकर्ता संघ (WUA), FPO, या क्लस्टर-आधारित सिंचाई प्रणालियाँ भी पात्र हैं।

PM कुसुम योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया (PM Kusum Yojana Online Application Process)

PM-KUSUM योजना के लिए आवेदन करना अब काफी सरल हो गया है। आप नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करके आसानी से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं:

  1. आधिकारिक पोर्टल पर जाएँ: सबसे पहले, आपको नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) की PM-KUSUM योजना के आधिकारिक राष्ट्रीय पोर्टल (pmkusum.mnre.gov.in) पर जाना होगा। इसके अलावा, कुछ राज्यों की अपनी राज्य नोडल एजेंसी (SNA) पोर्टल भी उपलब्ध हैं, जैसे मध्य प्रदेश के लिए mprenewable.nic.in और महाराष्ट्र के लिए महाऊर्जा (mahaurja.com)। फर्जी वेबसाइटों से सावधान रहें।
  2. रजिस्ट्रेशन/आवेदन का विकल्प चुनें: पोर्टल पर आपको “Apply” या “Registration” का विकल्प मिलेगा, उस पर क्लिक करें।
  3. घटक का चुनाव करें: आपको अपनी आवश्यकतानुसार योजना के घटक (Component-A, Component-B, या Component-C) का चयन करना होगा।
  4. आवेदन पत्र भरें: खुले हुए ऑनलाइन आवेदन फॉर्म में अपनी व्यक्तिगत जानकारी, भूमि का विवरण, और पंप से संबंधित जानकारी (यदि लागू हो) सही-सही भरें।
  5. आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें: सभी मांगे गए दस्तावेजों को स्कैन करके निर्धारित फॉर्मेट में अपलोड करें।
  6. आवेदन शुल्क (यदि लागू हो) का भुगतान करें: Component-A के लिए, प्रति मेगावाट ₹5000 + GST का आवेदन शुल्क लग सकता है।
  7. फॉर्म सबमिट करें: सभी जानकारी और दस्तावेज अपलोड करने के बाद, फॉर्म को सबमिट करें और दिए गए एप्लीकेशन ID को नोट कर लें। यह आपको आवेदन की स्थिति ट्रैक करने में मदद करेगा।
  8. वेंडर का चयन (घटक-B और C के लिए): रजिस्ट्रेशन के बाद, आपको MNRE-अनुमोदित वेंडरों (vendors) की सूची में से चुनाव करने का विकल्प मिल सकता है जो सोलर पंप की आपूर्ति और स्थापना करेंगे।
  9. किसान का अंश जमा करें: वेंडर के चयन के बाद, आपको कुल लागत का अपना 10% अंश जमा करना होगा।
  10. स्थापना और निरीक्षण: आपके अंशदान के बाद, सोलर पंप की स्थापना की जाएगी। विभाग द्वारा इसका निरीक्षण भी किया जाएगा।
  11. सब्सिडी का वितरण: आवेदन और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद, सब्सिडी राशि आपके बैंक खाते में सीधे जमा कर दी जाएगी। सब्सिडी sanction होने में लगभग 90-10 दिन लग सकते हैं।

एक छोटे किसान, रामू चाचा, जो पहले डीजल पंप से सिंचाई के लिए जूझते थे, आज PM-KUSUM की बदौलत अपने खेत में सोलर पंप लगाकर न सिर्फ अपनी फसल की सिंचाई आसानी से कर रहे हैं, बल्कि बची हुई बिजली बेचकर extra income भी कमा रहे हैं। यह उनकी ज़िंदगी में एक बड़ा बदलाव लेकर आया है।

PM कुसुम योजना के लिए आवश्यक दस्तावेज (Required Documents for PM Kusum Yojana)

आवेदन करते समय आपके पास निम्नलिखित दस्तावेज तैयार होने चाहिए:

  • आधार कार्ड (Aadhaar Card)
  • पहचान प्रमाण (जैसे पैन कार्ड, वोटर आईडी)
  • भूमि संबंधी दस्तावेज (खसरा-खतौनी, आरटीसी, पट्टा, या लीज के कागज)
  • बैंक खाता पासबुक की कॉपी (सब्सिडी सीधे खाते में आती है)
  • घोषणा पत्र (Declaration Form)
  • मोबाइल नंबर (आधार से लिंक होना चाहिए)
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • नवीनतम बिजली बिल की कॉपी (Component C के ग्रिड-कनेक्टेड सिस्टम के लिए)
  • आय प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)
  • सौर ऊर्जा संयंत्र के लिए परियोजना प्रस्ताव (Project Proposal) (Component A के लिए)
  • डिस्कॉम से अनापत्ति प्रमाण पत्र (Consent Letter) (Component A और C के लिए)
  • पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) (Component A के लिए)
  • अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (EMD) (Component A के लिए, ₹1 लाख प्रति मेगावाट के रूप में बैंक गारंटी)

PM कुसुम योजना के लाभ (Benefits of PM Kusum Yojana)

यह योजना किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए कई महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करती है:

  • कम होती सिंचाई लागत: डीजल और बिजली पर निर्भरता कम होने से किसानों की सिंचाई की लागत में भारी कमी आती है।
  • आय में वृद्धि: किसान अपने खेत में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाकर या अतिरिक्त सौर बिजली डिस्कॉम को बेचकर अतिरिक्त आय कमा सकते हैं।
  • पर्यावरण संरक्षण: सौर ऊर्जा के उपयोग से प्रदूषण कम होता है और यह पर्यावरण के अनुकूल है।
  • पानी और ऊर्जा सुरक्षा: किसानों को दिन के समय सिंचाई के लिए विश्वसनीय और सस्ती बिजली मिलती है, जिससे उनकी पानी और ऊर्जा की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
  • बंजर भूमि का उपयोग: किसान अपनी बंजर या अनुपयोगी भूमि का उपयोग सौर ऊर्जा संयंत्र लगाकर आय कमाने के लिए कर सकते हैं।
  • खेती जारी रखने की सुविधा: Component-A के तहत, सोलर पैनलों को पर्याप्त ऊंचाई पर लगाया जा सकता है, जिससे किसान पैनलों के नीचे भी अपनी खेती जारी रख सकें।
  • आर्थिक आत्मनिर्भरता: यह योजना किसानों को महंगे बिजली बिलों और डीजल के बोझ से मुक्त कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाती है।

PM-KUSUM योजना किसानों के जीवन में एक सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास है, जो उन्हें आधुनिक कृषि पद्धतियों और स्वच्छ ऊर्जा की ओर ले जा रही है।

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